ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का इतिहास & 100 PYQ| By-Raman Sir

ईस्ट इंडिया कंपनी: एक ऐतिहासिक यात्रा

व्यापारियों से शासक तक का सफर

यह कहानी है उस ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ की, जो भारत में केवल व्यापार करने के इरादे से आई थी, लेकिन यहाँ की परिस्थितियों और अपनी कूटनीति के बल पर उसने पूरे भारतवर्ष पर अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया। आइए, इस ऐतिहासिक यात्रा को बहुत ही आसान और रोचक कहानी के रूप में समझते हैं।

📜 कंपनी का उदय और भारत में प्रवेश

1. कम्पनी की स्थापना (The Beginning)

कहानी की शुरुआत होती है यूरोप से। 16वीं शताब्दी के अंत में, पुर्तगालियों और डचों ने पूर्वी देशों के साथ मसालों का व्यापार करके खूब धन कमाया। इसे देखकर इंग्लैंड के कुछ व्यापारियों के मन में भी लालच जागा। इन व्यापारियों के समूह को ‘मर्चेंट एडवेंचरर्स’ (Merchant Adventurers) कहा जाता था।

इन्होंने मिलकर एक कंपनी बनाई। 31 दिसंबर 1600 को, ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ प्रथम (Queen Elizabeth I) ने एक ‘रॉयल चार्टर’ (शाही फरमान) पर हस्ताक्षर किए। इस चार्टर ने इस नई कंपनी को अगले 15 वर्षों तक पूर्वी देशों (ईस्ट इंडीज) के साथ व्यापार करने का एकाधिकार (Monopoly) दे दिया। इसी कंपनी का नाम था – ‘गवर्नर एंड कंपनी ऑफ मर्चेंट्स ऑफ लंदन ट्रेडिंग इनटू द ईस्ट इंडीज’, जिसे हम बोलचाल में ‘ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी’ (EIC) कहते हैं।

2. कम्पनी का भारत आगमन

कंपनी बन तो गई, लेकिन भारत के दरवाजे खोलना इतना आसान नहीं था। भारत में उस समय मुगलों का शक्तिशाली शासन था और समुद्र में पुर्तगालियों का दबदबा था।

सन् 1608 में, ब्रिटिश कंपनी का पहला जहाज ‘हेक्टर’ (Hector) भारत के सूरत बंदरगाह पर पहुँचा। इस जहाज का कैप्टन था विलियम हॉकिन्स (William Hawkins)। हॉकिन्स ने आगरा जाकर तत्कालीन मुग़ल सम्राट जहाँगीर के दरबार में हाजिरी लगाई। वह तुर्की भाषा बोल सकता था, जिससे जहाँगीर बहुत प्रभावित हुआ और उसे ‘इंग्लिश खान’ की उपाधि भी दी। हालांकि, पुर्तगालियों के दबाव के कारण जहाँगीर ने अंग्रेजों को सूरत में फैक्ट्री खोलने की पक्की अनुमति तुरंत नहीं दी।

बाद में, अंग्रेजों ने 1612 में ‘स्वाली के युद्ध’ (Battle of Swally) में पुर्तगालियों को हरा दिया। इस जीत से जहाँगीर बहुत खुश हुआ और अंततः 1613 में सूरत में अंग्रेजों को अपनी पहली स्थायी फैक्ट्री (कारखाना) स्थापित करने की अनुमति मिल गई। इसके बाद 1615 में ब्रिटेन के राजा जेम्स प्रथम का राजदूत सर थॉमस रो (Sir Thomas Roe) जहाँगीर के दरबार में आया और उसने मुग़ल साम्राज्य के विभिन्न हिस्सों में व्यापार करने और फैक्टरियां खोलने की छूट प्राप्त कर ली।

⚓ कम्पनी का भारत में विस्तार

अंग्रेजों ने बहुत ही चालाकी से भारत के प्रमुख तटीय क्षेत्रों पर अपना कब्ज़ा जमाना शुरू किया। उन्होंने व्यापारिक चौकियों को किलों में बदलना शुरू कर दिया।

सूरत (Surat)

भारत में अंग्रेजों की पहली स्थायी फैक्ट्री (पश्चिमी तट)।

1613
1611

मछलीपट्टनम

दक्षिण भारत में अंग्रेजों की पहली (अस्थायी) व्यापारिक कोठी।

मद्रास (Madras)

फ्रांसिस डे (Francis Day) ने चंद्रगिरि के राजा से पट्टे पर लिया। यहाँ ‘फोर्ट सेंट जॉर्ज’ (Fort St. George) का निर्माण किया।

1639
1668

बंबई (Bombay)

1661 में पुर्तगाली राजकुमारी कैथरीन की शादी ब्रिटिश राजकुमार चार्ल्स द्वितीय से हुई, तो बंबई दहेज़ में मिला। 1668 में चार्ल्स ने इसे मात्र 10 पौंड वार्षिक किराये पर कंपनी को दे दिया। जेराल्ड ऑंगियार (Gerald Aungier) को बंबई का संस्थापक माना जाता है।

कलकत्ता (Calcutta)

जॉब चारनॉक (Job Charnock) ने सुतानुती, गोबिंदपुर और कलिकाता नामक तीन गांवों की जमींदारी खरीदी और कलकत्ता शहर बसाया। यहाँ ‘फोर्ट विलियम’ (Fort William) बना।

1690

प्रमुख प्रेसीडेंसी का उदय

ग्राफ दर्शाता है कि कैसे कंपनी ने अलग-अलग वर्षों में भारत के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों को स्थापित किया।

⚔️ बंगाल पर कब्ज़ा और निर्णायक युद्ध

फर्रुखसियर का फरमान (1717)

1715 में जॉन सुरमन के नेतृत्व में अंग्रेजों का एक दल मुग़ल सम्राट फर्रुखसियर के दरबार में गया। इस दल में डॉ. विलियम हैमिल्टन भी थे, जिन्होंने सम्राट की एक गंभीर बीमारी का सफलतापूर्वक इलाज कर दिया। खुश होकर फर्रुखसियर ने 1717 ई. में एक शाही फरमान जारी किया।

  • मात्र 3000 रुपये वार्षिक कर के बदले बंगाल में मुक्त व्यापार (Free Trade / Dastak) की छूट।
  • बंबई में ढले कंपनी के सिक्कों को पूरे मुग़ल साम्राज्य में मान्यता।

इसे ब्रिटिश इतिहासकार ओर्म (Orme) ने ‘कंपनी का मैग्नाकार्टा’ (महाअधिकार पत्र) कहा है। इसी फरमान के दुरुपयोग ने बंगाल के नवाबों और अंग्रेजों के बीच दुश्मनी के बीज बोए।

प्लासी का युद्ध (23 जून 1757)

बंगाल का नवाब सिराजुद्दौला अंग्रेजों द्वारा ‘दस्तक’ के दुरुपयोग और कलकत्ता की किलेबंदी से नाराज था। 1756 में उसने कलकत्ता पर हमला किया (इसी समय ब्लैक होल त्रासदी हुई जिसमें 146 अंग्रेजों को एक छोटी कोठरी में बंद कर दिया गया था)।

इसका बदला लेने मद्रास से रॉबर्ट क्लाइव (Robert Clive) सेना लेकर आया। क्लाइव ने कूटनीति से नवाब के सेनापति मीर जाफर को बंगाल का नवाब बनाने का लालच देकर अपनी ओर मिला लिया। 23 जून 1757 को प्लासी के मैदान में नाममात्र का युद्ध हुआ। सिराजुद्दौला हार गया और मारा गया। मीर जाफर को कठपुतली नवाब बना दिया गया।

परिणाम: अंग्रेजों ने बंगाल के खजाने को लूटा और भारत में राजनीतिक सत्ता की नींव रखी।

बक्सर का युद्ध (22 अक्टूबर 1764)

अंग्रेजों की लूट-खसोट से तंग आकर नए नवाब मीर कासिम ने विद्रोह कर दिया। उसने अवध के नवाब शुजाउद्दौला और मुग़ल सम्राट शाह आलम द्वितीय के साथ मिलकर एक संयुक्त सेना बनाई।

22 अक्टूबर 1764 को बिहार के बक्सर में यह भयंकर युद्ध हुआ। इसमें अंग्रेज सेनापति हेक्टर मुनरो (Hector Munro) ने इस तीनों की संयुक्त सेना को बुरी तरह हरा दिया।

महत्व: प्लासी एक धोखा था, लेकिन बक्सर अंग्रेजों की सैन्य श्रेष्ठता का प्रतीक था। इस युद्ध ने भारत में अंग्रेजों को वास्तविक शासक बना दिया।

इलाहबाद की संधि (अगस्त 1765)

बक्सर युद्ध के बाद रॉबर्ट क्लाइव वापस भारत आया और उसने 1765 में दो संधियाँ कीं। सबसे महत्वपूर्ण थी मुग़ल सम्राट के साथ संधि। मुग़ल सम्राट ने कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की ‘दीवानी’ (राजस्व वसूलने का अधिकार) दे दी।

बंगाल में द्वैध शासन (1765-1772)

रॉबर्ट क्लाइव ने बंगाल में ‘द्वैध शासन’ (Dual Government) लागू किया। इसके तहत:
दीवानी (पैसा और सेना): अंग्रेजों के पास।
निजामत (प्रशासन और जिम्मेदारी): नवाब के पास।
यह व्यवस्था जनता के लिए बहुत विनाशकारी साबित हुई क्योंकि जिसके पास शक्ति थी उसे जिम्मेदारी नहीं थी। अंततः 1772 में वारेन हेस्टिंग्स ने इसे समाप्त कर दिया और बंगाल का सीधा नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया।

🏛️ विगत परीक्षाओं के प्रश्न (PYQs)

विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में इस टॉपिक से पूछे गए वास्तविक प्रश्न। उत्तर देखने के लिए प्रश्न पर क्लिक करें।

📝 25 प्रश्नों का मॉक टेस्ट

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प्रश्न 1 / 25

Question will appear here

भारत का इतिहास – प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष प्रस्तुति

ईस्ट इंडिया कंपनी – PYQ स्मार्ट बैंक

📊 परीक्षा विश्लेषण (Exam Analytics)

यह अनुभाग विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, State PCS, SSC, Railway आदि) में ईस्ट इंडिया कंपनी से पूछे गए 100 महत्वपूर्ण पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs) का डेटा विश्लेषण प्रस्तुत करता है। नीचे दिया गया चार्ट दर्शाता है कि किस परीक्षा वर्ग से कितने प्रश्न इस संग्रह में शामिल किए गए हैं, जिससे आपको अपनी तैयारी की दिशा तय करने में मदद मिलेगी।

📌 महत्वपूर्ण तथ्य

  • यह संग्रह पूरी तरह से ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना, विस्तार, नीतियों और 1857 तक के प्रभाव पर केंद्रित है।
  • इसमें UPSC IAS/CDS/NDA, BPSC, UPPCS, MPPSC, SSC CGL और RRB के वास्तविक प्रश्न शामिल हैं।
  • स्वयं का परीक्षण करने के लिए प्रत्येक प्रश्न का उत्तर छिपा हुआ है। ‘उत्तर देखें’ पर क्लिक करें।

📝 इंटरएक्टिव प्रश्न बैंक (100 PYQs)

यहाँ ईस्ट इंडिया कंपनी से संबंधित 100 अति-महत्वपूर्ण प्रश्नों की सूची है। आप परीक्षा के प्रकार के आधार पर प्रश्नों को फ़िल्टर कर सकते हैं या किसी विशिष्ट कीवर्ड को खोज सकते हैं। अपनी तैयारी जाँचने के लिए पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर सत्यता की जाँच करें।

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संपूर्ण 100 प्रश्नों का संग्रह | प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए |BY:- GYANMUNCH

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