संस्कृत कक्षा 10 संस्‍कृतेन जीवनम् bihar board

संस्‍कृतेन जीवनम् पाठ का थंबनेल
बिहार बोर्ड (वर्ग 10) – संस्कृत द्रुतपाठाय (Second Sanskrit) – पाठ 10

संस्‍कृतेन जीवनम्

(संस्‍कृत से ही जीवन सफल होता है)

एहि मित्र हे सुधीरत्वां विचिन्तये सदा।
इह सखे समं मया हिखेल नन्द सन्ततम् ।।

अर्थ: हे मित्र ! हे सुधीर (धैर्यवान)! तुमको सदैव इसका विशेष मनन करना चाहिए। हे मित्र ! मेरे समान ही यह तुमको खेल जैसा आनन्द देने वाला है।

संस्कृतेन खेलनम्
कुर्महे सखे चिरम्।
तेन वाग्विवर्धनम्
प्राप्‍नुयाम सत्वरम् ॥

अर्थ: हे मित्र ! संस्कृत के साथ हमलोगों को चिरकाल तक खेल (अभ्यास/व्यवहार) करना चाहिए। उससे शीघ्र ही वाचा-शक्ति (बोलने की शक्ति) की वृद्धि प्राप्त करते हैं।

संस्कृतेन लेखनम्
सर्वबालरंजकम्
तेन शब्दरूपसिद्धिः
आप्यते सखे वरम् ॥

अर्थ: हे मित्र! सभी बच्चों को आनन्द देने वाला संस्कृत भाषा में ही सुन्दर लेखन करना चाहिए। जिससे शब्द-शक्ति (शब्द रूप की सिद्धि/ज्ञान) में श्रेष्ठता प्राप्त होती है।

संस्कृतेन भाषणम्
सर्वगर्वनाशकम्।
तेन रंजिता भवन्ति
सर्वदेवदेवताः॥

अर्थ: सबों के गर्व को नाश करनेवाला संस्कृत में ही बोलना चाहिए। उससे सभी को सब कुछ देने वाले देवता लोग प्रसन्न होते हैं।

संस्कृतेन चिन्तनं
सद्गुणाभिवर्धनम्।
तेन मानसं सखे
स्यात् सदा सुखान्वितम्॥

अर्थ: हे मित्र! संस्कृत चिन्तन (अध्ययन) करने से सद्गुणों की वृद्धि होती है । उससे (हमारा) हृदय सदैव सुखी रहता है।


यह पाठ संस्कृत को केवल एक भाषा नहीं, बल्कि जीवन की सफलता, आनंद और मानसिक शांति का आधार मानता है।

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