
gyanmunch.com पर प्रस्तुत Bihar Board Class 10 Sanskrit Chapter 14 शास्त्रकाराः की यह अध्ययन सामग्री छात्रों के लिए बेहद उपयोगी है। यहाँ आप संस्कृत पीयूषम् भाग–2 के इस अध्याय के सभी श्लोकों का संधि-विच्छेद, शब्दार्थ, सरल श्लोकार्थ, तथा Bihar Board Exam में पूछे जाने वाले Objective Questions, Short Answer, और 16 अंक वाले Long Questions का विस्तृत एवं सरल विश्लेषण पढ़ सकते हैं। इस पेज पर उपलब्ध सामग्री विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए तैयार की गई है जो BSEB Class 10 Sanskrit Notes, Sanskrit Chapter 1 Mangalam explanation, और Sanskrit objective questions with answers की खोज कर रहे हैं। gyamunch.com का यह अध्याय छात्रों की परीक्षा तैयारी को मजबूत बनाता है और उन्हें उच्च अंक प्राप्त करने में सहायता प्रदान करता है।
14. शास्त्रकाराः (शास्त्रों के रचयिता)
पाठ परिचय
भारतवर्ष में शास्त्रों की महान परंपरा सुनी जाती है। शास्त्र प्रमाणभूत और समस्त ज्ञान के स्रोतस्वरूप हैं। इस पाठ में प्रमुख शास्त्रों के निर्देशपूर्वक उनके प्रवर्तकों का निरूपण है। मनोरंजन के लिए यह पाठ प्रश्नोत्तर शैली में है।
[भारते वर्षे शास्त्राणां महती परम्परा श्रुयते । शास्त्रणि प्रमाणभूतानि समस्तज्ञानस्य स्त्रोतःस्वरूपाणि सन्न्ति । अस्मिन् पाठे प्रमुखशास्त्राणां निर्देशपूर्वकं तत्प्रवर्तकानाञ्च निरूपणं विद्यते । मनोरञ्जनाय पाठेऽस्मिन् प्रश्नोत्तरशैली आसादिता वर्तते ।]
शास्त्र का लक्षण
शिक्षकः: शास्त्रं नाम ज्ञानस्य शासकमस्ति । मानवानां कर्त्तव्याकर्त्तव्यविषयान् तत् शिक्षयति । शास्त्रमेव अधुना अध्ययनविषयः (Subject) कथ्यते, पाश्चात्यदेशेषु अनुशासनम् (Discipline) अपि अभिधीयते । तथापि शास्त्रस्य लक्षणं धर्मशासत्रेषु इत्थं वर्तते –
अर्थ: शास्त्र ज्ञान का शासक है। वह मनुष्यों को कर्तव्य और अकर्तव्य विषयों की शिक्षा देता है। शास्त्र को ही अब अध्ययन विषय (Subject) कहा जाता है। किन्तु धर्मशास्त्रों में शास्त्र का लक्षण इस प्रकार है:
अभिनवः: अर्थात् शास्त्रं मानवेभ्यः कर्त्तव्यम् अकर्त्तव्यञ्च बोधयति । शास्त्रं नित्यं भवतु वेदरूपम्, अथवा कृतकं भवतु ऋष्यादिप्रणीतम् ।
अर्थ: अर्थात् शास्त्र मनुष्यों को कर्तव्य और अकर्तव्य का बोध कराता है। शास्त्र चाहे वेदरूप में नित्य हो, अथवा ऋषियों द्वारा रचित होने से कृतक हो।
शिक्षकः: सम्यक् जानासि वत्स ! कृतकं शास्त्रं ऋषयः अन्ये विद्वांसः वा रचितवन्तः ।
अर्थ: बिल्कुल सही जानते हो वत्स! कृतक शास्त्र ऋषियों या अन्य विद्वानों ने रचे हैं।
षट् वेदाङ्ग शास्त्राणि
शिक्षकः: सर्वप्रथमं षट् वेदाङ्गानि शास्त्राणि सन्ति । तानि – शिक्षा, कल्पः, व्याकरणम्, निरूक्तम्, छन्दः, ज्योतिषं चेति ।
अर्थ: सबसे पहले छह वेदांग शास्त्र हैं। वे हैं – शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द और ज्योतिष।
शिक्षकः: श्रृणुत यूयं सर्वे सावहितम् । शिक्षा उच्चारणप्रक्रियां बोधयति । पाणिनीयशिक्षा तस्याः प्रसिद्धो ग्रन्थः ।
अर्थ: आप सब ध्यान से सुनें। शिक्षा (वेदांग) उच्चारण प्रक्रिया को समझाती है। पाणिनीयशिक्षा उसका प्रसिद्ध ग्रन्थ है।
शिक्षकः: कल्पः कर्मकाण्डग्रन्थः सूत्रात्मकः । बौधायन-भारद्वाज-गौतम-वसिष्ठादयः ऋषयः अस्य शास्त्रस्य रचयितारः ।
अर्थ: कल्प (वेदांग) कर्मकाण्ड का सूत्रात्मक ग्रन्थ है। बौधायन, भारद्वाज, गौतम, वसिष्ठ आदि ऋषि इस शास्त्र के रचयिता हैं।
शिक्षकः: व्याकरणं तु पाणिनिकृतं प्रसिद्धं । निरूक्तस्य कार्यं वेदार्थबोधः । तस्य रचयिता यास्कः
अर्थ: व्याकरण तो पाणिनि द्वारा रचित प्रसिद्ध है। निरुक्त का कार्य वेद के अर्थ का बोध कराना है। उसके रचयिता यास्क हैं।
शिक्षकः: छन्दः पिङ्गलरचिते सूत्रग्रन्थे प्रारब्धम्। ज्योतिषं लगधरचितेन वेदाङ्गज्योतिषग्रन्थेन प्रावर्तत।
अर्थ: छन्द (वेदांग) पिङ्गल द्वारा रचित सूत्रग्रंथ में प्रारम्भ हुआ। ज्योतिष (वेदांग) लगध द्वारा रचित वेदाङ्गज्योतिष ग्रन्थ से प्रचलित हुआ।
| वेदांग का नाम | कार्य | प्रवर्तक/प्रसिद्ध ग्रन्थ |
|---|---|---|
| शिक्षा | उच्चारण प्रक्रिया | पाणिनि (पाणिनीयशिक्षा) |
| कल्पः | कर्मकाण्ड का सूत्रात्मक ग्रन्थ | बौधायन, भारद्वाज, गौतम, वसिष्ठ आदि ऋषि |
| व्याकरणम् | पद-रचना और वाक्य-गठन | पाणिनि |
| निरूक्तम् | वेद के अर्थ का बोध | यास्क |
| छन्दः | सूत्र ग्रन्थ | पिङ्गल |
| ज्योतिषम् | खगोल ज्ञान | लगधर (वेदाङ्गज्योतिष) |
षड् दर्शन शास्त्राणि
अब्राहमः: किमेतावन्तः एव शास्त्रकाराः सन्ति ?
अर्थ: क्या इतने ही शास्त्रकार हैं?
शिक्षकः: नहि नहि । एते प्रवर्त्तकाः एव। वस्तुतः महती परम्परा एतेषां शास्त्राणां परवर्त्तिभिः सञ्चालिता। किञ्च, दर्शनशास्त्राणि षट् देशेऽस्मिन् उपक्रान्तानि ।
अर्थ: नहीं, नहीं। ये तो केवल प्रवर्तक ही हैं। वास्तव में, इन शास्त्रों की महान परंपरा बाद के विद्वानों द्वारा चलाई गई। और छह दर्शन शास्त्र भी इस देश में प्रवर्तित हुए।
श्रुतिः: आचार्यवर ! दर्शनानां के-के प्रवर्तकाः शास्त्रकाराः ?
अर्थ: आचार्यवर! दर्शनों के कौन-कौन प्रवर्तक शास्त्रकार हैं?
शिक्षकः: सांख्यदर्शनस्य प्रवर्तकः कपिलः । योगदर्शनस्य पतञ्जलिः। एवं गौतमेन न्यायदर्शनं रचितं कणादेन च वैशेषिकदर्शनम् । जैमिनिना मीमांसादर्शनम्, बादरायणेन च वेदान्तदर्शनं प्रणीतम् ।
अर्थ: सांख्य दर्शन के प्रवर्तक कपिल हैं। योग दर्शन के पतञ्जलि हैं। गौतम ने न्याय दर्शन की रचना की और कणाद ने वैशेषिक दर्शन की। जैमिनि ने मीमांसा दर्शन तथा बादरायण ने वेदान्त दर्शन की रचना की।
| दर्शन शास्त्र | प्रवर्तक |
|---|---|
| सांख्य दर्शन | कपिल |
| योग दर्शन | पतञ्जलि |
| न्याय दर्शन | गौतम |
| वैशेषिक दर्शन | कणाद |
| मीमांसा दर्शन | जैमिनि |
| वेदान्त दर्शन | बादरायण |
शिक्षकः: सर्वेषां शताधिकाः व्याख्यातारः स्वतन्त्रग्रन्थकाराश्च वर्तन्ते ।
अर्थ: इन सभी के सौ से अधिक व्याख्याकार और स्वतंत्र ग्रन्थकार हैं।
विज्ञान और अन्य शास्त्र
शिक्षकः: उक्तं कथयसि । प्राचीनभारते विज्ञानस्य विभिन्नशाखानां शास्त्राणि प्रावर्तन्त ।
अर्थ: तुम ठीक कहते हो। प्राचीन भारत में विज्ञान की विभिन्न शाखाओं के शास्त्र भी प्रचलित थे।
शिक्षकः: आयुर्वेदशास्त्रे चकरसंहिता, सुश्रुतसंहिता चेति शास्त्रकारनाम्नैव प्रसिद्धे स्तः । तत्रैव रसायनविज्ञानम्, भौतिकविज्ञानञ्च अन्तरर्भू स्तः ।
अर्थ: आयुर्वेद शास्त्र में चरकसंहिता और सुश्रुतसंहिता तो शास्त्रकार के नाम से ही प्रसिद्ध हैं। उन्हीं में रसायन विज्ञान और भौतिक विज्ञान भी सम्मिलित हैं।
शिक्षकः: ज्योतिषशास्त्रेऽपि खगोलविज्ञानं गणितम् इत्यादीनि शास्त्राणि सन्ति । आर्यभटस्य ग्रन्थः आर्यभटीयनामा प्रसिद्धः । एवं वराहमिहिरस्य बृहत्संहिता विशालो ग्रन्थः यत्र नाना विषयाः समन्विताः ।
अर्थ: ज्योतिष शास्त्र में भी खगोल विज्ञान, गणित आदि शास्त्र हैं। आर्यभट का ग्रन्थ ‘आर्यभटीय’ नाम से प्रसिद्ध है। इसी प्रकार वराहमिहिर का ‘बृहत्संहिता’ विशाल ग्रन्थ है जहाँ अनेक विषय समाहित हैं।
शिक्षकः: वास्तुशास्त्रमपि अत्र व्यापं शास्त्रमासीत्। कृषिविज्ञानं च पराशरेण रचितम् । वस्तुतो नास्ति शास्त्रकाराणाम् अल्पा संख्या ।
अर्थ: वास्तुशास्त्र भी यहाँ एक व्यापक शास्त्र था। कृषिविज्ञान पराशर द्वारा रचित है। वास्तव में, शास्त्रकारों की संख्या कम नहीं है।
उपसंहार
वर्गनायकः: गुरुदेव ! अद्य बहुज्ञातम् । प्राचीनस्य भारतस्य गौरवं सर्वथा समृद्धम् ।
अर्थ: गुरुदेव! आज बहुत कुछ जानने को मिला। प्राचीन भारत का गौरव हर प्रकार से समृद्ध है।
शिक्षकः: (शिक्षकः वर्गात् निष्क्रामति । छात्राः अनुगच्छन्ति ।)
अर्थ: (शिक्षक कक्षा से बाहर जाते हैं। छात्र उनका अनुसरण करते हैं।)
Chapter-14 (शास्त्रकाराः) – Subjective Question Answer in Hindi
प्रश्न 8. ‘शास्त्रकारा:’ पाठ के आधार पर शास्त्र की परिभाषा अपने शब्दों में लिखें। अथवा, गुरु के द्वारा शास्त्र का क्या लक्ष्य बताया गया है ?
- यह मनुष्यों को कर्तव्य एवं अकर्तव्य विषयों की शिक्षा देता है।
- जिस ग्रंथ से मनुष्यों को धर्म प्रवृत्ति अथवा पाप से निवृत्ति (आसक्ति अथवा विरक्ति) का उपदेश मिलता है, वह शास्त्र है, चाहे वह नित्य (वेद) हो या कृत्रिम (मनुष्यों द्वारा रचित) हो।
प्रश्न 5. वेदाङ्ग कितने है ? उनके प्रवर्तकों एवं शास्त्रों के नाम लिखें।
- शिक्षा (उच्चारण प्रक्रिया) प्रवर्तक: पाणिनि।
- कल्प (कर्मकाण्ड) प्रवर्तक: बौधायन, भारद्वाज आदि।
- व्याकरण (पद-रचना) प्रवर्तक: पाणिनि।
- निरुक्त (वेदार्थ बोध) प्रवर्तक: यास्क।
- छन्द (सूत्र ग्रन्थ) प्रवर्तक: पिङ्गल।
- ज्योतिष (खगोल ज्ञान) प्रवर्तक: लगधर ऋषि।
प्रश्न 12. भारतीय दर्शनशास्त्र एवं उनके प्रवर्तकों की चर्चा करें।
- सांख्य दर्शन: संस्थापक कपिल।
- योग-दर्शन: संस्थापक पतंजलि।
- न्याय-दर्शन: संस्थापक गौतम।
- वैशेषिक दर्शन: संस्थापक कणाद ऋषि।
- मीमांसा दर्शन: संस्थापक जैमिनी।
- वेदान्त दर्शन: संस्थापक बादरायण।
प्रश्न 3. विज्ञान की शिक्षा देनेवाले शास्त्र का परिचय दें।
- आयुर्वेद शास्त्र: इसमें चरक संहिता और सुश्रुत संहिता प्रमुख हैं (जिनमें रसायन विज्ञान और भौतिक विज्ञान भी अन्तर्भुत हैं)।
- ज्योतिष शास्त्र: इसमें खगोल विज्ञान और गणित शामिल हैं। आर्यभट्ट की आर्यभट्टीयम् विख्यात है।
- कृषि विज्ञान: इसके रचयिता महर्षि पराशर हैं।
प्रश्न 1. भारतीय शास्त्र कारों का परिचय दें l
- आयुर्वेद में चरक संहिता और सुश्रुत संहिता विश्व प्रसिद्ध हैं।
- खगोल ज्ञान में आर्यभट्ट और वराहमिहिर प्रसिद्ध हैं।
- व्याकरण के क्षेत्र में पाणिनि कृत व्याकरण विश्व प्रसिद्ध है।
- धर्म और दर्शन में कपिल, पतञ्जलि, गौतम आदि ऋषियों ने शास्त्रों की रचना की है।
प्रश्न 6. वेद कितने हैं ? सभी के नाम लिखें।
- ऋग्वेद
- सामवेद
- अथर्ववेद
- यजुर्वेद
प्रश्न 13. आयुर्वेद के प्रमुख ग्रन्थ कौन-कौन है ?
प्रश्न 2. ‘शास्त्रकारा:’ पाठ में प्रश्नोत्तर शैली अपनाने से हमें क्या शिक्षा मिलती है ?
प्रश्न 9. ज्योतिष शास्त्र के अन्तर्गत कौन-कौन शास्त्र है तथा उनके प्रमुख ग्रन्थ कौन से हैं ?
- उनके प्रमुख ग्रंथ आर्यभट्ट रचित ‘आर्यभट्टीयम्’ और वराहमिहिर रचित ‘वृहत्संहिता’ आदि हैं।
प्रश्न 10. कल्प ग्रन्थों के प्रमुख रचनाकारों का नामोल्लेख करें।
