मधुराष्टकम्
(श्री कृष्ण की मधुरता का वर्णन)
अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् ।
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मथुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।। 1।।
अर्थ: उनका ओष्ठ मधुर, शरीर (मुख) मधुर, नयन मधुर, हंसी मधुर, हृदय मधुर, चलना मधुर – मधुराधिपति (श्रीकृष्ण) का सारा चीज मधुर है।
वचन मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम् घलितं मधुरं।
भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलम् मधुरम् ॥ 2 ॥
अर्थ: उनकी बोली मधुर, जीवन (चरित्र) मधुर, वस्त्र मधुर, केश मधुर, चाल मधुर, घूमना मधुर – मधुराधिपति भगवान श्रीकृष्ण का सब कुछ मधुर है।
वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ।
नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।। 3 ॥
अर्थ: उनकी बाँसुरी मधुर, चरण धुलि (रेणु) मधुर, हाथ मधुर, दोनों पैर मधुर, नाच मधुर, दोस्ती मधुर – मधुराधिपति भगवान श्रीकृष्ण का सब कुछ मधुर है।
गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम्।
रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ 4 ॥
अर्थ: उनका गीत मधुर, पीताम्बर (पीला वस्त्र) मधुर, खाना मधुर, सोना मधुर, रूप मधुर, चन्दन (तिलक) मधुर – मधुराधिपति भगवान श्रीकृष्ण का सब कुछ मधुर है।
करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरम्।
वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥5॥
अर्थ: उनका कार्य करना मधुर, तैरना (तरण) मधुर, हरण करना (मन को मोहना) मधुर, रमण करना मधुर, वमन करना (मुंह से निकली हुई वस्तु) मधुर, शमन करना (शांति देना) मधुर – मधुराधिपति श्रीकृष्ण का सब कुछ मधुर है।
गुंजा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा।
सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ 6॥
अर्थ: उनकी गुंजा (वैजन्ती माला के दाने) मधुर, माला मधुर, यमुन मधुर, घाट मधुर, जल मधुर, कमल मधुर – मधुराधिपति भगवान श्रीकृष्ण का सबकुछ मधुर है।
गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम्।
दृष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं मधुराधिपतेरखिलम् मधुरम् ॥ 7 ॥
अर्थ: उनकी गोपी मधुर, लीला मधुर, मिलन (युक्तं) मधुर, बिछुरना (मुक्तं) मधुर, देखना मधुर, आचार मधुर – मधुराधिपति भगवान श्रीकृष्ण का सब कुछ मधुर है।
गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा मुष्टिर्मधुरा
दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥8॥
अर्थ: उनके ग्वाले (गोपा) मधुर, गाय मधुर, लाठी (यष्टिः) मधुर, मुट्ठी मधुर, दलन करना (शत्रुओं का विनाश) मधुर, फल देना (परिणाम) मधुर – मधुराधिपति भगवान् श्रीकृष्ण का सब कुछ मधुर है।
यह “मधुराष्टकम्” की संपूर्ण व्याख्या है, जो भगवान श्रीकृष्ण की ‘सर्वं मधुरं’ (सब कुछ मधुर है) लीला का वर्णन करती है।
