शुकेश्वराष्टकम्
(शुकेश्वर अष्टक)
सनातनं पुरातनं परोपकार-साधनम्,
जनस्य कामपूरक मनोजगर्वखर्वकम्।
शुकेश्वरं नमाम्यहं शुकेश्वरं नमाम्यहम्
शुकेश्वरं नमान्यहं शुकेश्वरं नमाम्यहम् ।।
**अर्थ:** सनातन स्वरूप, पुरातन स्वरूप, परोपकार को साधने वाले, भक्तों की इच्छा पूरा करने वाले और कामदेव के गर्व को चूर करने वाले शुकेश्वर महादेव को मैं प्रणाम करता हूँ।
जगत्तमोविनाशकं सदाऽव्ययप्रदाकम्
सदाशयं सहायक, सदाशिवं सुनायकम् ।
शुकेश्वरं नमाम्यहम्…
**अर्थ:** जगत के अज्ञानतारूपी तम (अंधकार) को विनाश करने वाले, सदैव अक्षयता (अव्यय) को प्रदान करने वाले, सत्याचरण करने वालों के सहायक, सदाशिव, सुनायक शुकेश्वर को मैं प्रणाम करता हूँ।
सतां सदा सुरक्षकं, दुराशयप्रवाधकम्
भजन्मनोविहारिणं, सदारिवन्दपीडकम् ।
शुकेश्वरं नमाम्यहम्…
**अर्थ:** सज्जनों के सदैव सुरक्षक, दुश्चरित्रों के बाधक (रोकने वाले), भजने वालों के मन में विहार करने वाले तथा दुश्मन समुद्र (अरि-वन्द) को सदैव पीड़ा देने वाले भगवान शुकेश्वर शिव को प्रणाम करता हूँ।
उमापितं सतीपति, नमामि तं महागतिम्
नमामि कालिकापति, नमामि तारिकापतिम् ।
शुकेश्वरं नमाम्यहम्…
**अर्थ:** उमापति, सतीपति तथा महागति (मोक्ष) देने वाले भगवान शंकर को प्रणाम है। कालिकापति, तारिकापति भगवान शुकेश्वर शिव को प्रणाम करता हूँ।
जटायुतं त्रिलोचनं त्रिमार्गगामस्तकम्
गजस्य चर्मधारिणं त्रिशूलशस्वधारिणम् ।
शुकेश्वरं नमाम्यहम्…
**अर्थ:** जटाधारी, त्रिलोचन (तीन आँखों वाले), गंगा जल से जिनका मस्तक गीला रहता है (त्रिमार्गगामस्तकम्), हाथी की खाल को धारण करने वाले, त्रिशूल नामक शस्त्र धारण करने वाले भगवान शुकेश्वर शिव को प्रणाम करता हूँ।
नवेन्दुना सुभोभितं सुदिव्यपुष्पपूजितम्
मयूरगीततोषितं, सुभक्तिगीतर्कीतितम् ।
शुकेश्वरं नमाम्यहम्…
**अर्थ:** द्वितीया के चन्द्रमा (बालचंद्र/नवेन्दु) से सुशोभित, सुन्दर दिव्य पुष्पों से पूजित होने वाले, मयूर के गीत से संतुष्ट होने वाले, भक्ति के सुन्दर गायन से कीर्तिवान, भगवान शुकेश्वर शिव को प्रणाम करता हूँ।
जलप्रियं महेश्वरं कृष: फलप्रदायकम्
जनेश्वरं शुकेश्वरं, सुभूमनित्यपालकम् ।
शुकेश्वरं नमाम्यहम्…
**अर्थ:** जल के प्रिय, महेश्वर, कृषि में फल देने वाले, मनुष्य के ईश्वर (जनेश्वर), शुक के ईश्वर (शुकेश्वर), सहपात्रों (या सुन्दर भूमि) को सदैव पालन करने वाले भगवान शुकेश्वर शिव को मैं प्रणाम करता हूँ।
सुबोधदं सुभक्तिपदं सुभुक्तिमुक्तिदायकम्
चतुष्फलप्रदायक, विशालरूपधारकम् ।
इदं शुकेश्वराष्टकं तु वैद्यनाथकीर्तितम्
पठन्नरः सभक्ति यः, शिवो ददाति वाञ्छितम्।
शुकेश्वरं नमाम्यहम्…
**अर्थ:** सुन्दर ज्ञान देने वाले, सुन्दर भक्ति देने वाले, सुन्दर भोग और मुक्ति देने वाले, धर्म-अर्थ, काम-मोक्ष (चतुष्फल) को प्रदान करने वाले, विशाल रूप धारण करने वाले भगवान शुकेश्वर शिव को मैं प्रणाम करता हूँ। वैद्यनाथ के द्वारा गाया गया यह शुकेश्वर अष्टक जो व्यक्ति भक्तियुक्त होकर पाठ करेगा, उसे भगवान शिव मनोकामना पूरी कर देते हैं।
यह स्तोत्र भगवान शिव की महिमा और उनके विभिन्न गुणों का सार प्रस्तुत करता है।
