Bihar Board Class 10 sanskrit bhag 2 chapter 11 पर्यटनम् ( देशाटन ) – paryatnam in Hindi

पर्यटनम् पाठ का थंबनेल
बिहार बोर्ड (वर्ग 10) – संस्कृत द्रुतपाठाय (Second Sanskrit) – पाठ 11

पर्यटनम्

(नासिक और पंचवटी का वर्णन)

(क) नासिकक्षेत्रम्

महाराष्टदेशे पवित्रायाः गोदावरीनद्याः तीरे विलसति नासिकक्षेत्रम। शूर्पणखाया: नासिका अत्रैव छिन्ना लक्ष्मणेन इत्यतः स्थानस्यास्य तत् नाम इति वदन्ति अत्रत्याः। नासिक इत्यपि कथ्यमानम् एतत् अनेकै: कारणैः प्रसिद्धम् अस्ति। गोदावर्याः एकस्मिन् नासिकनगरं चेत् अपरस्मिन् पार्श्‍वे अस्ति पञ्चवटीक्षेत्रम्।

**अर्थ:** महाराष्ट्र प्रदेश में पवित्र गोदावरी नदी के किनारे नासिक क्षेत्र शोभता है। यहाँ के लोग कहते हैं कि शूर्पणखा की नाक लक्ष्मण के द्वारा यहीं काटी गई थी, इसी कारण इस स्थान का नाम नासिक पड़ा। गोदावरी के एक तरफ नासिक नगर है और दूसरी तरफ पञ्चवटी नामक क्षेत्र है।

कुम्भमेल: प्रचलति इति कारणत: नासिकक्षेत्रं प्रयागमिव हरिद्वारमिव पवित्रं मन्यते श्रद्धालवः। द्वादशषु वर्षेषु एकदा प्रचलति अयं कुम्भमेलः। … गोदावरी द्रष्टं नदीरीर गतवता मया विस्मयः प्रायः यतः तत्र जलन नासीत् । ततः कारणं ज्ञातं यत् कुम्भमेलस्य निमित्रं नद्याः तटयोः व्यवस्था: कर्तम इदानी तस्याः प्रवाहः अन्यत्र एवं नीतः अस्ति इति । अतः श्रारामकुण्डनामकात् स्थानात अनन्ता नद्याः पात्रं केवलं दृष्टं, न तु जलम् ।

**अर्थ:** कुम्भमेला यहीं लगता है, इसी कारण श्रद्धालु लोग नासिक क्षेत्र को प्रयाग और हरिद्वार के जैसा पवित्र मानते हैं। यह कुम्भ मेला बारह वर्षों में एक बार आता है। गोदावरी देखने के लिए नदी के तीर पर जब मैं गया तो मुझे आश्चर्य हुआ, क्योंकि वहाँ जल ही नहीं था। इसका कारण ज्ञात हुआ कि- कुम्भ मेला के निमित्त नदी के दोनों तटों पर व्यवस्था की गई है और इस समय नदी की धारा अन्यत्र मोड़ दी गई है। इसलिए श्रीराम कुण्ड नामक स्थान से यहाँ तक नदी का केवल **आकार** ही दिखाई पड़ता है, न कि जल।

श्रीरामकुण्डस्य पार्श्‍वे स्थिते कस्मिंश्चित् भवने सम्मिलिताः श्रद्धालवः धार्मिक विधिष निरताः आसन् । तत्पावस्थे भवने महात्मागान्धेः चिताभस्म सुरक्षितम् अस्ति । **श्रीरामकण्ट एतत् वैशिष्टयम् अस्ति यत् तत्रत्ये कस्मिश्चित् निश्चिते स्थाने विसृष्टम् अस्थि काभिश्चित एव घण्टाभिः द्रुतं भवति इति ।** … अतः एव अत्र अस्थिविसर्जन कर्तुं देशस्य नानाभागेभ्य: बहवः श्रद्धालवः समागच्छन्ति।

**अर्थ:** श्रीराम कुण्ड के समीप स्थित किसी भवन में श्रद्धालु लोग धार्मिक अनुष्ठान में लगे थे। उसी के निकट के भवन में महात्मा गाँधी की चिता का भस्म सुरक्षित है। **श्री रामकुण्ड की यह विशेषता है कि यहाँ किसी निश्चित स्थान पर विसर्जन की गई हड्डी कुछ ही घंटों में गल जाती है।** यहाँ अस्थि-विसर्जन अत्यन्त पुण्यकर्म माना जाता है। इसलिए यहाँ अस्थि-विसर्जन करने देश के अनेक भागों से बहुत श्रद्धालु लोग आते हैं।

गोदावर्याः तीरे स्थितं त्र्यम्बकेश्वरमन्दिरं नशेशङ्करमन्दिरं नासिकस्य क्षेत्रस्य अपरे प्रेक्षणीये स्थाने । सरदारनारोशङ्करनामकेन 1747 तमे क्रिस्ताब्दे 18 लक्ष्यरूण्यकात्मकव्ययेन निर्मितम् एतत् मन्दिरं शिल्पकलादृष्ट्या अत्यन्तं विशिष्टम् अस्ति । देवालयस्य उपरि काचित् महती घण्टा प्रतिष्ठापिता अस्ति या पोर्चुगल्देशे निर्मिता इति श्रूयते ।

**अर्थ:** गोदावरी नदी के तीर पर स्थित त्र्यम्बकेश्वर मंदिर (यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है) और नारोशंकर मंदिर नासिक के अन्य देखने योग्य स्थान हैं। सरदार नारो शंकर नामक राजा के द्वारा 1747 ई. सन् में 18 लाख रुपये के खर्च से निर्मित यह मंदिर शिल्प कला की दृष्टि से अत्यन्त विशिष्ट स्थान रखता है। मं‍दिर के ऊपर एक बहुत बड़ी घण्टा बंधी है, जो पोर्चुगल देश में बनी, ऐसा कहा जाता है।

(ख) पञ्चवटी

पञ्चानां वटानां समाहार: पञ्चवटी- इति असकृत् पठितमेव अस्माभि:। तन्नाम्ना अभिधीयामने रचाने अद्यापि विलसन्ति पञ्च वटवृक्षाः। जीर्णानां पुरातनानां महावृक्षाणां स्थाने तन्मूलादेव उत्पन्नाः एते वृथाः न तथा महाकायाः सन्ति यथा अस्माभिः चिन्तयन्ते ।

**अर्थ:** पाँच वट वृक्षों का समूह ‘पंचवटी’ ऐसा हमलोगों के द्वारा पढ़ा गया है। उस नाम से कहे जाने वाले स्थान पर आज भी पाँच वट वृक्ष दिखाई पड़ते हैं। पुराने विशाल वृक्षों के स्थान पर उसी की जड़ से ही उत्पन्न ये पाँचों वृक्ष उतने विशाल नहीं हैं जैसा कि हमलोग सोचते होंगे।

पञ्चवट्या पुरतः एव अस्ति **सीतागुहा**। यदा शूर्पणखाया: नासिकाच्छेदः जातः तदा अग्रे सम्भाव्यमानं राक्षसानाम् आक्रमणं विचिन्त्य श्रीरामः अस्यामेव गुहायां सीतां सुरक्षितरूपेण संस्थाज्य स्वयं च खरदूषणादिभिः चतुर्दशसहस्त्रराक्षसैः सह युद्धम् अकरोत् । शरीरं सङ्कोच्य गुहा प्रविष्टा चेत् अन्तः अघो भागे प्रतिष्ठापितानां सीतारामलक्ष्मणानां मूर्तीनां दर्शनं कर्तुं शक्यम् । परन्तु हा, यदि भवन्तः स्थूलकायाः, ताहि नाहन्ति गुहां प्रवेष्टुम् ।

**अर्थ:** पंचवटी के सामने ही **सीता गुहा** है। जब शूर्पणखा की नाक काट ली गई, तब राक्षसों के आक्रमण की सम्भावना का विचार कर श्रीराम ने इसी गुफा में सीता को सुरक्षित रूप से रखकर स्वयं खरदूषण आदि चौदह हजार राक्षसों के साथ युद्ध किए थे। शरीर को संकुचित करके गुफा में प्रवेश करने पर भीतर नीचे भाग में स्थापित सीता, राम और लक्ष्मण की मूर्तियों के दर्शन कर सकते हैं। परन्तु हाँ, यदि आप मोटे शरीर के हैं तो गुफा में प्रवेश नहीं कर सकते हैं।

ततः एव अन्यां गुहां प्रवेष्टुं मार्गः अस्ति। तस्यां च गुहायां भगवतः पञ्चरलेश्वरस्य महालिङ्गम् अस्ति । भगवान् श्रीराम: स्वहस्ताभ्याम् अस्य अर्चनम् अकरोत् इति वदन्ति अत्रत्याः । … कालाराममंदिरम् अत्रत्यम् अपरं प्रेक्षणीय स्थानम् । विशाले सुन्दर च अस्मिन् मन्दिरे भगवतः श्रीरामस्य कृष्णशिलानिर्मिता मूर्तिः अस्ति । डा. भीमराव अम्बेदकर: अस्मिन् एव मन्दिरे हरिजनानां प्रवेशं कारयितुम् आन्दोलनम् कृतवान् आसीत्।

**अर्थ:** वहीं से अन्य गुफा में प्रवेश के लिए रास्ता है। उस गुफा में भगवान **पञ्चरत्नेश्वर का बहुत बड़ा शिवलिङ्ग** है। यहाँ के लोग कहते हैं कि भगवान श्रीराम अपने हाथों से इनकी पूजा की थी। **कालाराम मंदिर** यहाँ का दूसरा देखने योग्य स्थान है। विशाल और सुन्दर इस मंदिर में भगवान श्रीराम की काले पत्थर से निर्मित मूर्ति है। डॉ. भीमराव अम्बेदकर इसी मंदिर में हरिजनों के प्रवेश कराने के लिए आन्दोलन किए थे।


नासिक और पंचवटी दोनों ही धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान हैं, विशेषतः रामायण काल से जुड़े हुए।

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